हे प्रिय ! वियोग में तेरे रस है प्रेम का। जो सरल और सुंदर है। हे प्रिय ! वियोग में तेरे रस है प्रेम का। जो सरल और सुंदर है।
प्रिय मेरे.............. प्रिय मेरे..............
मन मेरा शून्य में है हाँ मन मेरा शून्य में है कोई सब कुछ खोकर भी खुदा की इबादत करने ज मन मेरा शून्य में है हाँ मन मेरा शून्य में है कोई सब कुछ खोकर भी खुदा की इ...
चक्रवात के चक्कर में त्राहि-त्राहि है मन घिसा पीटा हुआ लग रहा है नश्वर जीवन।। चक्रवात के चक्कर में त्राहि-त्राहि है मन घिसा पीटा हुआ लग रहा है नश्वर ...
आज कल की दोस्ती पैसे से मजबूत होती है दिल तो खिलौना है एक साथ पल गुज़ारना तो बहाना है...।। आज कल की दोस्ती पैसे से मजबूत होती है दिल तो खिलौना है एक साथ पल गुज़ारना तो...
मैं खुद को अब आईने में पहचान नहीं पाती। मैं खुद को अब आईने में पहचान नहीं पाती।